Poultry
ब्रायलर पोल्ट्री ट्रेनिंग हिंदी !

पोल्ट्री फार्म में कितना लाभ होता है ?

इस पोस्ट में हम जानेगें कि ,अलग अलग तरह के पोल्ट्री फार्म में कितना लाभ या नुक्सान हो सकता है !

पोल्ट्री फार्म के अनेक रूप है !

1-पैरेंट पक्षी पालन जो ब्रायलर और लेयर पक्षी दोनों के लिये हो सकता है !

2-व्यावसायिक ब्रायलर पोल्ट्री पालन !

3 -अंडे देने वाली मुर्गी का पालन

4- घर में थोड़ी मुर्गियों का पालन

5- देसी नस्ल की मुर्गियों का बड़े स्तर पर पालन !

6- टर्की , ईमू जैसे पक्षियों का पालन !

7- पैरेंट पक्षी के पैरेंट का मुर्गी पालन !

अब यहाँ प्रश्न ये उठता है , कि किस तरह के मुर्गी पालन में अधिक लाभ है ! पर इस प्रश्न का जवाब  इतना आसान नहीं की कुछ शब्दों में दिया जा सके !

साधारण सी दो बातें प्रत्येक पोल्ट्री के लाभ को व्यक्त करती है !

  • जिस काम में जितनी प्रतिस्पर्धा कम होगी ,उतना ही लाभ अधिक होगा !
  • बाजार की डिमांड और  सप्लाई !
  • परन्तु यह बात ध्यान रखें , कि पोल्ट्री का कोई भी व्यवसाय करें उसमे नुक्सान का जोखिम जरूर बना रहता है !

1-पैरेंट पक्षी पालन जो ब्रायलर और लेयर पक्षी दोनों के लिये हो सकता है !

इस तरह की पोल्ट्री फार्मिंग 1 % से भी कम किसान करते है ! और इसमें बहुत अधिक पैसा लगाना पड़ता है ! इस तरह के काम में करोडो और अरबों का खर्चा करना पड़ता है !

तो यह व्यवसाय कम लोग ही करते है ! और ज्यादातर यह बेहद बड़े लाभ वाला काम है ! यह देखा गया है प्रति चूजा 1 रूपये से 20 रूपये या उससे भी ज्यादा हो सकता है ! अगर आपकी हैचरी में 50000 चूजे रोज होते है ! तो आपक लाभ खुद आंकलन कर लीजिये ! लाखों चूजे प्रतिदिन उत्पादन करने वाली अनेकों  हैचरियाँ है ! लेकिन यह कभी कभार नुक्सान में भी जा सकती है ! परन्तु ज्यादातर या लाभ में ही रहती है !

2-ब्रायलर पोल्ट्री फार्मिंग में लाभ ! यह मुख्यतः 2 तरह की होती है ! खुद से ब्रायलर पालन या कांट्रेक्ट ब्रायलर मुर्गी पालन !

कॉन्ट्रैक्ट पोल्ट्री फार्मिंग में नुक्सान की संभावना नगण्य होती है ! इसमें प्रति किलो आपको 6 से 8 रुपये कंपनियां देती है ! उदाहरण के तौर पर आपने 10000 पक्षी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से पाले और प्रति पक्षी का वज़न औसत 2.5 kg हुआ तो 25000 किलो वजन के हिसाब से आपको  6 से 8 रुपये कंपनियां देती है ! और साल में आप  4 से  5 बार  25000 किलो वजन के बैच डाल सकते है ! इसमें बिजली और बिछावन का खर्च आपको करना होता है ! और पक्षी निकल जाने के बाद जो खाद बचती है वो आप बेच कर भी अलग से आय कर सकते है ! सभी कंपनियों के अलग अलग अनुबंध होते है !

अगर आप खुद से  ब्रायलर पोल्ट्री फार्म चलाते है ! तो सभी लाभ और नुक्सान की जिम्मेदारी आपकी होती है ! इस तरह की पोल्ट्री में  सभी खर्चे आपके होते है ! इसमें लाभ ब्रायलर बिकते वक़्त ब्रायलर के भाव बीमारियों और प्रबंधन पर निर्भर करता है ! यह बेहद लाभदायक और नुक्सान दायक भी हो सकता है !

मैं तो यह सलाह दूंगा की शुरुवात में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और बाद में खुद से पोल्ट्री फार्मिंग कर सकते है !

3- अंडे वाली मुर्गी में मुर्गी पालन में मुनाफा !-अंडे वाले मुर्गी पालन में ज्यादातर मुनाफा ही देखा गया है ! इसमें 200 रूपये प्रति पक्षी 1.5 या इससे ज्यादा भी बचत हो जाती है ! लेकिन किसी वायरल या बैक्टीरियल बीमारी , या किसी अन्य कारणों से कमाई घट भी सकती है ! और नुकसान भी हो सकता है ! इसमें भी लागत बहुत ज्यादा है जो प्रति पक्षी 700 -800  पक्षी को अंडे पर आने तक  है !  इसमें शेड और फीड मिल का  एक बार बड़े स्तर पर होता है !

4– घर या आँगन में छोटे स्तर पर देसी पालन !जैसे कड़कनाथ , वनराजा ,ग्राम प्रिया क्रायलर  या अन्य नस्लें ! इससे प्राप्त अंडे काफी अच्छी गुणवत्ता के होते है ! और घरेलू खपत और बेचने पर हमेशा मुनाफे में ही रहते है ! इसमें ध्यान  बात है कि पक्षी को संतुलित आहार मिलना जरूरी है ! .और यह मांस और अंडे दोनों के लिये

6-टर्की और ईमू अत्यधिक मेहनत का काम है और भारत में इसकी अच्छी मार्किट नहीं है !

7- पैरेंट पक्षी के पैरेंट का मुर्गी पालन ! – इस तरह के प्रोजेक्ट में अरबों रूपये लगते है और सालों की रिसर्च लगती है और मात्र गिनी चुनी कम्पनियाँ ही करती है ! यह व्यवसाय ज्यादातर बड़े मुनाफे में ही रहती है !

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