Vaccination for poultry
ब्रायलर पोल्ट्री ट्रेनिंग हिंदी !

पोल्ट्री में वैक्सीन करते हुए जरूरी जानकारियां और सावधानियां !

वैक्सीनेशन  -पोल्ट्री में अनेकों वैक्सीन्स होती है ! परन्तु पेरेंट पक्षी को वैक्सीन देने से काफी रोग प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है ! परन्तु फिर भी काफी तरह की वैक्सीन ब्रायलर पक्षी को देनी पड़ती है ! जो देश या भौगोलिक परिस्थितयों और पूर्व में आयी वायरल बीमारियों पर निर्भर करती है !

अगर कोई वायरल बीमारी काफी वक़्त से किसी एरिया में नहीं आयी तो भी उस वैक्सीन को छोड़ा नहीं जा सकता ! वैक्सीनेशन से पक्षी के शरीर में ऐन्टीबॉडी बनती है , जो ब्रायलर को वायरल बीमारियों से बचाती है  !

जब भी लाइव वैक्सीन का आखिरी ढक्क्न खोलें , उसे ठन्डे पानी में डाल कर खोलें !

वैक्सीन के लिए डाई भी आती है ! जो किसी मुर्गियों की दवाई के विक्रेता के पास आसानी से मिल जाती है ! इसका फायदा ये होता है ,कि आपको पता चल जाता है ,कि किस चूज़े ने वैक्सीन नहीं ली !

डाई एक रंग है जो वैक्सीन में मिलाने से चूजे की चोंच को रंगीन कर देता है ! और जिस चूजे ने वैक्सीन वाला पानी नहीं पिया !

आपके चूजों को लाइव वैक्सीन 2 घंटों में पूरी हो जानी चाहिये !

हमेशा वैक्सीन को लाने  के लिए आईज बॉक्स का इस्तेमाल करें ! ताकि रास्ते में कोई ट्रैफिक जाम या कोई अन्य समस्या हो तो वैक्सीनेशन का तापमान सही बना रहे ताकि वैक्सीन के फेल होने की संभावना ना हो !

कुछ बर्फ बनाने वाली फैक्ट्रियां पानी में कुछ डिसइंफेक्टेंट या क्लोरीन मिलाते है ! और वही बर्फ अगर आपने वैक्सीन में उपयोग कर ली तो वैक्सीन बर्बाद हो सकती है ! इसलिए बर्फ अच्छी गुणवत्ता की होनी बहुत जरूरी है !

हमेशा वैक्सीन के लिये खूब सारी  बर्फ लेकर रख लें ताकि , वैक्सीन की गुणवत्ता प्रभावित ना हो !

अपने स्टाफ या कर्मचारियों को पूरी ट्रेनिंग जरूर दें ! और हर बात खूब गहराई से समझायें ,ताकिआपकी अनुपस्थिति में कोई भी गलती ना हो !

वैक्सीन करने का सही वक़्त सुबह सुबह ही उत्तम माना जाता है ! इसकी मुख्य वजह है की उस समय वातावरण ठंडा होता है ! जो गर्म इलाकों में  वैक्सीन की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने देती ! दूसरी वजह है कि ,जिन स्थानों  में बिजली की व्यवस्था कमज़ोर होती है , वहाँ वैक्सीन करते वक़्त बिजली जाने पर अँधेरे का ख़तरा नहीं रहता !

कुछ पोल्ट्री किसान रात में वैक्सीन करने का रिस्क ले लेते है ! और बिजली जाने पर बड़ी भूल कर चुके है !

 

वैक्सीन करते वक़्त पानी का PH 5.5-7.5.के बीच उत्तम होता है !ज्यादा  PH

पानी कड़वा कर सकता है और कम PH वैक्सीन की गुणवत्ता प्रभावित कर सकता है !

वैक्सीन करने से पहले पक्षियों को कुछ वक़्त प्यासा ज़रूर रखें ! ताकि पक्षी वैक्सीन का पानी जल्द से जल्द पी लें !

पक्षी को प्यासा रखने का वक़्त 1 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिये !

जिस बर्तन में वैक्सीन बना रहें हों , वह हर तरह से डिसइंफेक्टेंट ,क्लोरीन और डिटर्जेंट से मुक्त होना चाहिये ! वैक्सीन करते वक़्त उसमे बिना मलाई वाला दूध मिलाना बेहतर होता है ! इससे वैक्सीन की गुणवत्ता अच्छी देखि गयी है और यह वैक्सीन के पानी को स्थिर कर देता है !

वैक्सीन की डाई या रंग कंपनी के बताये निर्देशों के अनुसार करना चाहिये !

अगर किसी तरह का क्लोरीनेशन पानी में चल रहा है तो वैक्सीन से 2 -3 दिन पहले बंद कर देना चाहिये ! ताकि किसी भी तरह का अंश पानी में ना रहे और वैक्सीन की गुणवत्ता पर कोई असर ना पड़े !

अगर आप अल्ट्रा वायलेट बिजली का उपयोग करते है तो उसे भी बंद कार दें ! क्योंकि वह भी वैक्सीन की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती है !

हमेशा वैक्सीन को बताये गए समय (  Example- day 1, or day 9 ) पर ही उपयोग में लाना चाहिये ! अगर किसी मजबूरी में वैक्सीन देर से कर रहे है तो वैक्सीन निर्माता की बताये तरीके से ही करें !  और अगर पक्षी ज्यादा बीमार है तो वैक्सीन नहीं करनी चाहिये ! यह नुक्सान भी कर सकती है !

जो वैक्सीन बच जाए ,उसे दबा देना या आग में ख़त्म कर देना चाहिये ! नहीं तो बची वैक्सीन किसी बड़े नुक्सान का कारण बन सकती है !

वैक्सीन करते हुए पानी बहुत ज्यादा या कम बिल्कुल नहीं होना चाहिये !

वैक्सीन करते हुए कितना पानी लेना चाहिये ? 

इसके लिये निम्नलिखित तरीके को अपना सकते है !

मान लीजिये आप छटे  दिन वैक्सीन कर रहे है , और 1000 चूजों को वैक्सीन कर रहे है !

1000 को 6 ( पक्षी 6 दिन का है इसलिए ) से गुना कर दीजिये !

फिर जो भी संख्या आये उसे 2 से गुना कर दीजिये ! मतलब 12000 ml  या 12 लीटर !

इसी तरह अपने चूजों की संख्या को जिस दिन वैक्सीन  करनी है उसे 2 से गुना करके जो संख्या आये उतने ml पानी लेना है!

इससे 2 घंटे की वैक्सीन का पानी कितना लगना है , वह आ जाएगा !

1 Ltr वैक्सीन में 2 -3 चम्मच सूखे दूध के मिला दें ! या 1 ltr पानी में 50 ml साधारण मलाई निकला दूध मिला सकते है ! दूध या सूखा दूध पानी में वैक्सीन करने से कम से कम आधा घंटा पहले मिला लें ! ताकि दूध पानी में मौजूद किसी क्लोरीन तत्त्व को बैलेंस कर सकें !

 

वैक्सीन करने से पहले वैक्सीन की एक्सपायरी no . चेक जरूर करें ! और सीरियल no . नोट करके रख लें ! सीरियल no . का वैक्सीन की किसी क़्वालिटी से  सम्बन्ध नहीं है परन्तु किसी दुर्लभ केस में कोई समस्या आ जाती है तो आप निर्माता कंपनी को फीडबैक दे सकते है !

वैक्सीन करने के दौरान बैठे चूजों को बीच बीच में हिलाते रहें , ताकि प्रत्येक चूज़े को वैक्सीन का पानी मिल सके !

वैक्सीन करते वक़्त सावधानियाँ – पानी के बर्तनों को अच्छे से धो लेना चाहिये उनमे पुराना पानी बिलकुल भी नहीं होना चाहिये ! वैक्सीन के पानी को सभी बर्तनों में बराबर बराबर बाँट देना चाहिये ! उदाहरण के तौर  पर अगर आपने 20 ltr वैक्सीन का पानी बनाया है और 20 पानी के ड्रिंकर या बर्तन है तो सभी बर्तनों में 1 ltr वैक्सीन का पानी आयेगा !

 

अगर ड्रिंकर में इतनी क्षमता नहीं है तो थोड़े थोड़े पानी से बार बार थोड़ा वैक्सीन का पानी डालते रहो ! वैक्सीन बनाने से पहले ये सुनिश्चित कर लें , की हाथ साबुन से धुले हों और दोबार साफ़ पानी से दुबारा धुले हों  ताकि साबुन का अंश भी हाथों से निकल जाये ! अगर डिस्टिल्ड पानी का उपयोग करते है तो वो ज्यादा बेहतर माना जाता है !

वैक्सीन को  को सूर्य की सीधी रोशनी में नहीं बनाया जाना चाहिये ! इससे वैक्सीन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है !

बर्फ की अलग मात्रा अपने पास जरूर रखें ताकि अगर किसी गर्म मौसम में वैक्सीन  पानी गर्म होने की संभावना हो तो बर्फ मिलाई जा सके !

वैक्सीन का कोई भी अंश बच जाये तो उसे ज़मीन में दबा देना चाहिये !

वैक्सीन करने से 2 दिन पहले चूजों को मल्टी विटमिन और मल्टी मिनरल ज़रूर देने चाहियें !

वैक्सीन से 2 दिन पहले एंटीबायोटिक बंद हो जाने चाहियें (अगर दे रहे है ) !

हमेशा डोज़ को 2 बार चेक ज़रूर करें ! वैक्सीन की डोज़ कभी भी ज्यादा नहीं देनी चाहिये !

हर वैक्सीन देने का अलग तरीका होता है ! उसे उसी तरीके से ही देना चाहिये!

वैक्सीनके लगभग 2 घंटे तक प्रत्येक शेड से अलग अलग जगह से 25 चूज़े चेक करें और देखे कितने चूजों के चोंच या जीभ पर  वैक्सीन वाली डाई के निशान है ! अगर कम से कम 24 चूजों पर डाई के निशान हो तो आप समझें वैक्सीन सफल मानी जाती है !

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